वक़्त करवट लेता है,
और लेगा भी ज़रूर.!


देखना होगा चकनाचूर,
मनचलों का गरूर.!!

कब तक पिसेगी नारी,
इन शोहदों से हज़ूर.!


खुदा एक दिन इनकी,
दुआ करेगा मंज़ूर.!!

नशेमन बेख़ौफ़ हैं जो,
उतरेगा इनका सरूर.!


जब नारी हो जायेगी,
अपने हितों से सरोबूर.!!